मौला इतना बतला दे तू , क्यों बिसमिल -बिसमिल फिरता हूँ ?
है कौन मुसलसल सा मुझमें , जिसे रोज़ तलाश मै करता हूँ ?
मुझको मुझसे यूँ रिहा कर दे ,
मै मिल जाऊँ जो फ़िर मुझमें।
तू उतना ही मेरा भी है ,
मै जितना रहता हूँ तुझमें।
Picture clicket at Fatehpur sikri, Agra, India



