
तू नूर है वो, तू वो 'सच' है; ये सूरज जिससे जलता है।
ये चंदा जिसके उजाले से; खुद को रौशन करता है।
बिखरे- से मेरे इन प्राणों में, फिर से अपनी आभा भर दे।
अपने जादू के शीशे पर; घिस दे मुझको ताज़ा कर दे...
तुने दी है खुदाई-सी मुझको, ये विरासत सलामत रखना सदा।
मुझे रखना संभाले खुद में यूँ ही।
करना न कभी मेरी जड़ से जुदा...
करना न कभी मेरी जड़ से जुदा..
ये चंदा जिसके उजाले से; खुद को रौशन करता है।
बिखरे- से मेरे इन प्राणों में, फिर से अपनी आभा भर दे।
अपने जादू के शीशे पर; घिस दे मुझको ताज़ा कर दे...
तुने दी है खुदाई-सी मुझको, ये विरासत सलामत रखना सदा।
मुझे रखना संभाले खुद में यूँ ही।
करना न कभी मेरी जड़ से जुदा...
करना न कभी मेरी जड़ से जुदा..