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Sunday, August 15, 2010

मै हर बार जनम लूंगी...

मै फिर जन्म लूंगी।

फिर मै इसी जगह आउंगी।

यें जो बिखर गएँ हैं लोग।

यें जो तोड़ रहें हैं देश मेरा।

यें विभाजित जिनके दिल हैं आज।

इन दिलों को मैं फिर से मिलाऊँगी...

मै फिर जन्म लूंगी।

फिर मै इसी जगह आउंगी...


हर ओरे द्वेष कि आग लगी; ये ख्वाब तो फिर भी पलता है।

सब प्रेम बदलते देखें हैं, यह 'प्यार' मगर न बदलता है।

यह प्यार है तुझसे देश मेरे; ये साथ मेरे मुझमे चलता है...

यह जो सो गएँ हैं लोग।

भ्रष्टता कि धुंध में खो गएँ है लोग।

बुराई कि आवाजों से हारकर चुप हो गएँ हैं लोग।

इनमे सोये उस रोष, उस आग को मै फिर जलाऊंगी।

मै फिर जन्म लूंगी।

फिर मै इसी जगह आउंगी।


जिस ओरे कदम मै रखती हूँ; भुखमरी गरीबी छायी है।

ट्रेनों के डब्बे उड़ायें किसने खेतों में आग लगाईं है।

नन्ही जानों को मसला है;

यें जो गुनाहों के कीचड में सन गएँ हैं लोग।

यें जो खुद से ही अजनबी बन गएँ हैं लोग।

यें जो नफरतों को फैला रहें हैं।

यें जो लोगों के घर जला रहें हैं।

इन्हें मैं।

फिर से प्यार करना सिखाउंगी।

मै फिर जन्म लूंगी।

फिर मै इसी जगह आउंगी।


जो राह चुनी है मैंने, वहाँ दूर दूर खारा सागर लहराता है।

फिर भी उस पार खड़ा कोई; मुझको खींच बुलाता है।

जब जब हताश हो हारू मै; मार्गदर्शक एक सितारा -सा।

कुछ है जो मुझमें मिल जाता है; जलता है, मुझे जलाता है।

मैं आज चलीं हूँ आग पे इस।

एक दिन यें सब भी आएँगे...

यें जो बिखर रहें हैं लोग।

यें जो तोड़ रहें है देश मेरा...

यें विभाजित हैं जिनके दिल आज।

इनके दिलों को मै फिर से मिलाऊँगी...

मै हर बार जनम लूंगी।

हर बार मै इसी जगह आउंगी....