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Thursday, July 1, 2010

यह बारिश कि बूँदें....


ये बारिश कि बूँदें भिगोतीं हैं मन को।
ये लम्हें मिला दें धरा से गगन को।
मै हर बूँद को अपने रब से मिला लूँ.
मै फिर अपनी कश्ती में दीपक जला लूँ
मै बस डूब जाऊं।
मै बस मुस्कुराऊं।
यूँही आसमा मुझपे गिरता रहे बस।
ये पल मेरे दिल को यूँ मिलता रहे बस।
ये बारिश कि बूँदें भिगोतीं हैं मन को।
ये लम्हें मिला दें धरा से गगन को।

2 comments:

  1. i hv never read such a beautiful description of raindrops..awesome one..seriously a must read for all poetry lovers..:)

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