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Thursday, October 21, 2021

वो आयी थी तुम्हारे लिए

तुमने देखा उसका रूप

उसका काजल

बाली

कुमकुम

नहीं देखा बस

- उसका विघात -

- उसका भटकाव -

- उसका अनंत -


तुमने सुनी उसकी सांसे

उसका स्पर्श

स्पंदन

कंपन

नहीं सुनी मगर कभी

- उसकी किलकारी -

- उसकी उदासी -

- उसका गान -


जो तुमने देखा और सुना

वह तो उसका था ही नहीं

न वह लायी थी उसे

तुम्हें सौंपने


पर वो आई थी तुम्हारे लिए

और लाई थी

तुम्हें देने को

बस तुम्हें देने को

अपना सुख दुख

अपना बचपन

अपना वितान ।

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